ख़लील टोंकी के अशआर
बज़्म-ए-ख़लवत में तक रही थी उसे
शम्अ’ आख़िर को गुल किए ही बनी
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टैग : गुल
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere