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Sufinama
Khwaja Haidar Ali Aatish's Photo'

ख़्वाजा हैदर अली आतिश

1778 - 1846

19वीं सदी की उर्दू ग़ज़ल का रौशन सितारा।

19वीं सदी की उर्दू ग़ज़ल का रौशन सितारा।

ख़्वाजा हैदर अली आतिश के अशआर

शैदा-ए-रू-ए-गुल हैं शैदा-ए-क़द्द-ए-सर्व

सय्याद के शिकार हैं इस बोसताँ में हम

कू-ब-कू फिरता हूँ मैं ख़ाना-ख़राबों की तरह

जैसे सौदे का तेरे सर में मेरे घर हो गया

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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