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ख़्वाजा सुलैमान तौंसवी

1770 - 1850 | तौंसा, पाकिस्तान

ख़्वाजा सुलैमान तौंसवी के सूफ़ी उद्धरण

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दुनियादार लोगों की संगत से दूर रहो, क्योंकि ये लोग जब दुनिया में डूबते हैं, तो ख़ुदा का ख़ौफ़ उन के दिलों से चला जाता है। यहाँ तक कि उन के दिल में चींटी के काटे के बराबर भी ख़ुदा का ख़ौफ़ नहीं बचता।

इश्क़ के रास्ते में हिम्मती और बहादुर बनो और उसकी मुश्किलों को दिल से स्वीकार करो।

साधक को चाहिए कि हर किसी की इज़्ज़त करे और ख़ास तौर पर अपने पीर भाईयों का बहुत ख़्याल रखे।

साधक को चाहिए कि हर काम ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ करे।

दिल की सफ़ाई और रूहानी कामयाबी के लिए शरीअत पर चलना बेहद अहम है।

मुर्शिद-ए-कामिल का दामन थामे रहो और हमेशा उनकी संगत में रहो, ताकि तुम्हें ख़ुदा तक पहुँचने का दर्जा मिल सके।

साधक को चाहिए कि हमेशा ख़ुदा की इबादत करता रहे, क्योंकि जो जितनी इबादत करेगा, उतनी जल्दी अपने मक़सद को पहुँचेगा।

साधक को चाहिए कि वह दुनिया से दूर रहे, क्योंकि दुनिया की मिसाल कूड़ा-कचरे की तरह है और जो व्यक्ति दुनिया की चाह रखता है, वह एक गधे के समान है।

साधक को चाहिए कि हमेशा नफ़्स और शैतान से डरता रहे और कभी उन से मुत्मईन हो।

मुर्शिद-ए-कामिल का दामन थामे रहो और हमेशा उनकी संगत में रहो, ताकि तुम्हें ख़ुदा तक पहुँचने का दर्जा मिल सके।

कोई शख़्स जब तक ख़ुदा का पसंदीदा नहीं हो सकता है, जब तक कि वो ज़ाहिरी और बातिनी तौर पर शरीअत को नहीं मानता

तीन चीज़ों से अपने आप को दूर रखो-

पहला क़ाज़ी बन कर हुक्म देने से, दूसरा किसी की ज़िम्मदारी लेने से, तीसरा किसी की अमानत अपने पास रखने से

ये वसीयत हमारे पीर अपने मुरीदों को करते थे।

साधक को चाहिए कि किसी को हिक़ारत की निगाह से देखे।

مرشد کے منصب کا حقیقی حقدار وہی شخص ہے جو اپنے مرید کے حالات سے باخبر ہو اور اس کی مدد کے لیے متوجہ ہو جائے، خواہ وہ ہزاروں میل دور ہی کیوں نہ ہو۔

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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