मौलाना अ’ब्दुल क़दीर हसरत के अशआर
आईना-रु के सामने हम बन के आईना
हैरानियों का एक तमाशा करेंगे हम
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अब तो मैं राहरव-मुल्क-ए-अ’दम होता हूँ
तिरा हर हाल में हाफ़िज़ है ख़ुदा मेरे बा’द
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere