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मोहसिन काकोरवी

1826 - 1905 | आगरा, भारत

ना’त कहने वाला एक अ’ज़ीम शाइ’र जिसे हस्सान-ए-वक़्त के लक़ब से याद किया जाता था

ना’त कहने वाला एक अ’ज़ीम शाइ’र जिसे हस्सान-ए-वक़्त के लक़ब से याद किया जाता था

मोहसिन काकोरवी के अशआर

आरज़ू है कि तिरा ध्यान रहे ता-दम-ए-मर्ग

शक्ल तेरी नज़र आए मुझे जब आए अजल

शब-ए-दैजूर अंधेरे में है बादल के निहाँ

लैला महमिल में है डाले हुए मुँह पर आँचल

आईना आब-ए-तमव्वुज से बहा जाता है

कहिए तस्वीर से गिरना कहीं देख सँभल

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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