नातिक़ लखनवी के अशआर
ये वक़्त है मुझपे बंदगी का कहो जिसे सजदा कर लूं वर्ना
अज़ल से ता अहद-ए-आफ़रीनश मैं आप अपना ख़ुदा रहा हूँ
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टैग : ख़ुदा
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere