निसार अकबराबादी के अशआर
नौ-असीर-ए-फ़ुर्क़त हूँ वस्ल-ए-यार मुझ से पूछ
हो गई ख़िज़ाँ दम में सब बहार मुझ से पूछ
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टैग : असीर
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ख़्वाब है न बेदारी शुक्र है न होशियारी
लुत्फ़-ए-लज़्ज़त-ए-कैफ़-ए-बे-ख़ुमार मुझ से पूछ
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टैग : ख़्वाब
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बाग़-ओ-बहिश्त-ओ-हूर-ओ-जन्नत अबरारों को कीजिए इनायत
हमें नहीं कुछ उस की ज़रूरत आप के हम दीवाने हैं
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टैग : जन्नत
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नौ-असीर-ए-फ़ुर्क़त हूँ वस्ल-ए-यार मुझ से पूछ
हो गई ख़िज़ाँ दम में सब बहार मुझ से पूछ
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टैग : ख़िज़ाँ
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere