क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी के सूफ़ी उद्धरण
ख़ुदा के वजूद के बारे में दी जाने वाली तमाम फ़लसफ़ियाना दलीलो को रद्द किया जाना चाहिए, क्योंकि उन की बुनियाद अक्ल पर है और अक्ल ख़ुद में अधूरी है।
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
दरअस्ल, इंसान न तो पूरी तरह से आज़ाद है और न ही पूरी तरह से मजबूर। तमाम इंसानों की तखलीक़ खुदा की मर्ज़ी पर मुन्हसिर है, लेकिन वे अपना रास्ता चुनने के लिए आज़ाद हैं।
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
जब महबूब का कोई निशां न रहे, तो तुम भी बे-निशाँ हो जाओ और फूल की ख़ुशबू की तरह फूल ही में छुप जाओ और उसी जैसे नज़र आओ।
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
ख़ुदा की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ कुछ भी नहीं किया जा सकता, फिर भी वो इंसान की आज़ादी के इरादे को तस्लीम करता है। इंसान अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ महदूद मानी में अमल करने के लिए आज़ाद है।
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
सालिक को फ़ना की हालत में हक़ीक़त का पता चलता है। इस हालत में पाक ज़ात का इल्म ज़ाहिर होता है। दूसरे अल्फ़ाज़ में कहा जाए तो आरिफ़ ख़ुदा को तब पहचानता है, जब वो ख़ुद से ज़ुदा हो जाता है।
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
तमाम इंसान एक जैसी फ़ितरत के मालिक नहीं होते, कुछ लोगों की रूह दूसरों से बेहतर और ज़्यादा कामिल होती हैं और वो लोग अपनी सलाहियतों और ख़्वाहिशात के मुताबिक़ अपने काम को अंजाम देती हैं।
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
जिस शख़्स को ख़ुदा के साथ मुआमला नहीं है, उस की बात किसी के दिल में असर नहीं करती।
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
ज्ञान के दो प्रकार हैं: पहला इन्द्रिय आधारित ज्ञान - जो आत्मा या इन्द्रियों से प्राप्त होता है और दूसरा रूहानी ज्ञान - जो औलिया अपने प्रकाशवान मन में प्राप्त करते है। रूहानी ज्ञान, सब से अधिक विश्वसनीय होता है, क्योंकि यह ख़ुदा के करम से प्राप्त होता है और इस का संबंध ख़ुदा की विशेषताओं से है।
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere