शाह अली जीव गामधनी के अशआर
इतनी बात न बूझी लोगाँ आप निभाता करी सो कुए
इ’ल्म क़ुदरत जिस थोरा होवे की मजबूर विचारा होए
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टैग : इल्म
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere