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Shah Taqi Raaz Barelvi's Photo'

शाह तक़ी राज़ बरेलवी

बरेली, भारत

शाह तक़ी राज़ बरेलवी के सूफ़ी उद्धरण

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पीर की पैरवी किए बिना ख़ुदा तक पहुँचना बहुत मुश्किल है।

मुरीद को चाहिए कि कोई भी काम अपने पीर की इजाज़त के बिना करे।

तुम्हारे आख़िरी समय में तुम्हें सिर्फ़ पीर का तसव्वुर और तुम्हारी रूह ही सहारा देगी।

दुनिया में कोई भी चीज़ मोहब्बत के बिना पैदा नहीं हुई।

किसी को ख़ुदा को पहचानने की ख़्वाहिश है, तो पहले माँ की सूरत इख़्तियार करे, फिर बाप की।

ख़ुदा का नाम लो और किसी के सामने हाथ मत फैलाओ।

जिस्म तो एक दिन मिट जाने वाली चीज़ है, अगर उस की सफ़ाई में ज़्यादा समय लगाया जाए, तो रूह की सफ़ाई का समय नहीं बचता।

पीर अपने मुरीद की रूह को साफ़ करता है।

पीर से जितनी ज़्यादा मोहब्बत की जाए, उतना अच्छा है, क्योंकि इस में गुनाह की कोई सूरत पैदा नहीं होती।

अगर पीर चाहे तो वह मुरीद को अपना रूहानी तसव्वुर देता है।

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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