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कलाम14
फ़ारसी सूफ़ी काव्य19
रूबाई1
सूफ़ी उद्धरण10
ना'त-ओ-मनक़बत24
सलाम2
बसंत1
होली1
गीत2
शाह तक़ी राज़ बरेलवी के सूफ़ी उद्धरण
तुम्हारे आख़िरी समय में तुम्हें सिर्फ़ पीर का तसव्वुर और तुम्हारी रूह ही सहारा देगी।
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किसी को ख़ुदा को पहचानने की ख़्वाहिश है, तो पहले माँ की सूरत इख़्तियार करे, फिर बाप की।
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जिस्म तो एक दिन मिट जाने वाली चीज़ है, अगर उस की सफ़ाई में ज़्यादा समय लगाया जाए, तो रूह की सफ़ाई का समय नहीं बचता।
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पीर से जितनी ज़्यादा मोहब्बत की जाए, उतना अच्छा है, क्योंकि इस में गुनाह की कोई सूरत पैदा नहीं होती।
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere