शमीम जयपुरी के अशआर
ज़ब्त-ए-ग़म-ए-फ़िराक़ की मजबूरियाँ ना पूछ
दिल में किसी को याद किया और रो लिए
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टैग : ग़म
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere