तुलसी साहिब हाथरस वाले के अशआर
धध्धा ध्यान धरो घट माहिँ सुरति को काढ़ि निकारी
उलटि चलो असमान हिये बिच होत उजारी
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टैग : आसमान
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere