आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "लगातार"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "लगातार"
सूफ़ी उद्धरण
अगर कलाम चाँदी है, तो ख़ामोशी सोना। ख़ामोशी में दिल और ज़बान के ज़रिए लगातार ख़ुदा का ज़िक्र होता है।
शैख़ नजमुद्दीन कुबरा
व्यंग्य
मुल्ला नसरुद्दीन- पहली दास्तान
"पूरी रक़म।" उसने फिर कहा।सात बार लगातार उसने यही कहा और हर बार वह हारा।
लियोनिद सोलोवयेव
अन्य परिणाम "लगातार"
क़िस्सा
क़िस्सा चहार दर्वेश
मुबारक से यह सुन कर बोला, ‘बहुत अच्छा, मैं यह चाहता हूँ कि वह बाक़ी न
अमीर ख़ुसरौ
सूफ़ी लेख
हिन्दुस्तान में क़ौमी यक-जेहती की रिवायात-आ’ली- बिशम्भर नाथ पाण्डेय
वो ज़माना ऐसा था कि चाहे शिवाजी हो या औरंगज़ेब गोलकुंडा का सुल्तान हो या बीजापुर
मुनादी
सूफ़ी लेख
Sheikh Naseeruddin Chiragh-e-Dehli
उसके बाद शेख़ ने एक आह भरी ! मैं और तुम ! हम ऐसे भूखे दरवेश
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
समकालीन खाद्य संकट और ख़ानक़ाही रिवायात
आप खाना बहुत कम तनाउल फ़रमाते।रियाज़त के ज़माने में लगातार सात-सात दिन तक रोज़े रखते और
रहबर मिस्बाही
सूफ़ी लेख
हज़रत ग़ौस ग्वालियरी और योग पर उनकी किताब "बह्र-उल-हयात"
हज़रत ग़ौस ग्वालियरी शत्तारिया सिलसिले के महान सूफ़ी संत थे. शत्तारी सिलसिला आप के समय बड़ा
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
मौलाना जलालुद्दीन रूमी
रूम के बादशाह, कैक़ुबाद की प्रार्थना पर शैख़ बहाउद्दीन पुत्र –पौत्र सहित क़ून्या आ गए। सन
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
पीर नसीरुद्दीन ‘नसीर’ महद से लहद तक
’’मुझे याद है कि मेरे शाइरी करने के बिल्कुल शुरुआती ज़माने में हज़रत पीर मेहर अली