न है बुत-कदा की तलब मुझे न हरम के दर की तलाश है नुसरत फ़तेह अली ख़ान
न है बुत-कदा की तलब मुझे न हरम के दर की तलाश है अज्ञात
सँभल ऐ दिल किसी का राज़ बे-पर्दा न हो जाए अज्ञात
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न है बुत-कदा की तलब मुझे न हरम के दर की तलाश है नुसरत फ़तेह अली ख़ान
न है बुत-कदा की तलब मुझे न हरम के दर की तलाश है अज्ञात
सँभल ऐ दिल किसी का राज़ बे-पर्दा न हो जाए अज्ञात
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