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न मैं आलिम न मैं फ़ाज़िल न मुफ़्ती न क़ाज़ी हूना दिल मेरा दोज़ख़ ते ना शौक़ बहिश्ती राज़ी हू
ज़ुल्फ़ों को जहाँ तू लहराएमय-ख़ानों में हलचल मच जाए
'अली इमाम-ए-मनस्त-ओ-मनम ग़ुलाम-ए-'अलीहज़ार जान-ए-गिरामी फ़िदा-ए-नाम-ए-'अली
मेरी हर नज़र में सनम ही सनम हैसनम की नज़र में करम ही करम है
'अली इमाम-ए-मन-अस्त-ओ-मनम ग़ुलाम-ए-’अलीहज़ार जान गिरामी फ़िदा ब-नाम-ए-'अली
मेरी आँखों में आ गया कोईअपना जल्वा दिखा गया कोई
कुफ़्र-ए-सनम नसीब हुआ सलाम हो न होमक़्बूल-ए-ख़ास-ओ-’आम ये बदनाम हो न हो
मिरा चाहना देख क्या चाहता हूँफ़क़त तुझ को जान-ए-वफ़ा चाहता हूँ
रात सारी जनाब ख़ूब रहीइंतिज़ारी जनाब ख़ूब रही
खींच दी तस्वीर तू ने ऐ मोहब्बत पीर कीदिल में जल्वा पीर का आँखों में सूरत पीर की
मजबूर हूँ लाचार हूँ ऐ जान-ए-तमन्नामैं जीने से बेज़ार हूँ ऐ जान-ए-तमन्ना
क्यूँ परेशाँ है तबी'अत आज-कलक्या किसी से है मोहब्बत आज-कल
मिले मुझ को मेरा बांका सँवरिया आरज़ू दारमबिछाऊँ हर क़दम पर ये नज़रिया आरज़ू दारम
ख़ुदा की शान मेरे पीर हैं जीनबी की जान मेरे पीर हैं जी
निशान-ए-बे-निशानी चाहता हूँमकान-ए-ला-मकानी चाहता हूँ
कीजिए लुत्फ़-ओ-करम ऐ जान-ए-मनता-ब-के-जौर-ओ-सितम ऐ जान-ए-मन
क्या से क्या दो दिन में हालत हो गईदिल न आया इक क़यामत हो गई
दीद-ए-दिलदार है तो सब कुछ हैतो गर यार है तो सब कुछ है
इन दिनों जोश-ए-जुनूँ है तेरे दीवाने कोलोग हर-सू से चले आते हैं समझाने को
मन का माला जप रहा हूँ रख के तुम को सामनेआरज़ू ये है कि निकले दम तुम्हारे सामने
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