वासिफ़ अली वासिफ़ के अशआर
मिला है जो मुक़द्दर में रक़म था
ज़हे क़िस्मत मिरे हिस्से में ग़म था
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टैग : ग़म
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अश्कों ने बयाँ कर ही दिया राज़-ए-तमन्ना
हम सोच रहे थे अभी इज़हार की सूरत
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टैग : इज़हार
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चारों-सम्त अंधेरा फैला ऐसे में क्या रस्ता सूझे
पर्बत सर पर टूट रहे हैं पाँव में दरिया बहता है
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टैग : अँधेरा
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जिस आँख ने देखा है उस आँख को देखूँ
है उस के सिवा क्या तेरे दीदार की सूरत
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टैग : आँख
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सँभल जाओ चमन वालो ख़तर है हम न कहते थे
जमाल-ए-गुल के पर्दे में शरर है हम न कहते थे
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टैग : गुल
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इक चेहरे से प्यार करूँ मैं इक से ख़ौफ़ लगे है मुझ को
इक चेहरा इक आईना है इक चेहरा पत्थर लगता है
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टैग : आईना
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वजूद-ए-ग़ैर हो कैसे गवारा
तिरी राहों में बे-साया गया हूँ
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टैग : ग़ैर
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मेरी सुंदरता के गहने छीन के वो कहता है मुझ से
वो इंसान बहुत अच्छा है जो हर-हाल में ख़ुश रहता है
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टैग : इंसान
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ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-अय्याम के साँचे में ढलता है
कि इक ग़म दूसरे का चारागर है हम न कहते थे
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टैग : ग़म
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अजब ए'जाज़ है तेरी नज़र का
कि हम भूले हैं रस्ता अपने घर का
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टैग : घर
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मिला है जो मुक़द्दर में रक़म था
ज़हे क़िस्मत मिरे हिस्से में ग़म था
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टैग : क़िस्मत
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जिसे तू राएगाँ समझा था 'वासिफ़'
वो आँसू इफ़्तिख़ार-ए-जाम-ए-जम था
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टैग : आँसू
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पत्ते टूट गए डाली से ये कैसी रुत आई
माला के मनके बिखरे हैं दे गए यार जुदाई
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टैग : जुदाई
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इक चेहरे से प्यार करूँ मैं इक से ख़ौफ़ लगे है मुझ को
इक चेहरा इक आईना है इक चेहरा पत्थर लगता है
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टैग : चेहरा
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ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-अय्याम के साँचे में ढलता है
कि इक ग़म दूसरे का चारागर है हम न कहते थे
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टैग : चारागर
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इक चेहरे से प्यार करूँ मैं इक से ख़ौफ़ लगे है मुझ को
इक चेहरा इक आईना है इक चेहरा पत्थर लगता है
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टैग : ख़ौफ़
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उस का चेहरा कब उस का अपना था
जिस के चेहरे पर मर मिटे चेहरे
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टैग : चेहरा
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ख़्वाजा मिरे का राज़ निराला ख़्वाजा मिले तो रैन उजाला
दरस बना जग घोर अंधेरा दिन अपने भी रातें हैं
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टैग : अँधेरा
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere