Font by Mehr Nastaliq Web
Allama Iqbal's Photo'

अल्लामा इक़बाल

1877 - 1938 | लाहौर, पाकिस्तान

अल्लामा इक़बाल

कलाम 32

फ़ारसी कलाम 3

 

फ़ारसी सूफ़ी काव्य 1

 

बैत 2

 

ना'त-ओ-मनक़बत 7

क़िता' 4

 

मसनवी 9

वीडियो 19

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
अन्य वीडियो

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

दिल से जो बात निकलती है असर रखती है नुसरत फ़तेह अली ख़ान

अज़ दैर-ए-मुग़ाँ आयम बे-गर्दिश-ए-सहबा मस्त

मुंशी रज़ीउद्दीन

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़िर नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में

फरीद अयाज़

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़िर नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में

ख़ुदी का सिर्र-ए-निहाँ ला-इलाहा-इल्लल्लाह

ख़ुदी का सिर्र-ए-निहाँ ला-इलाहा-इल्लल्लाह नुसरत फ़तेह अली ख़ान

जब 'इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही

आबिदा परवीन

जवाब-ए-शिकवा

दिल से जो बात निकलती है असर रखती है अज़ीज़ मियाँ

तु रह-नवर्द-ए-शौक़ है मंज़िल न कर क़ुबूल

अज्ञात

तिरे 'इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

हाजी महबूब अ'ली

दयार-ए-इश्क़ में अपना मक़ाम पैदा कर

दयार-ए-इश्क़ में अपना मक़ाम पैदा कर नुसरत फ़तेह अली ख़ान

दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है

अज्ञात

मता’-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़ आरज़ू-मंदी

बख़्शी सलामत अली

ये पयाम दे गई है मुझे बाद-ए-सुब्ह-गाही

बख़्शी सलामत अली

वही मेरी कम-नसीबी वही तेरी बे-नियाज़ी

अज्ञात

शिकवा

क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँ अज़ीज़ मियाँ

शिकवा

क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँ नुसरत फ़तेह अली ख़ान

हर शै मुसाफ़िर हर चीज़ राही

अज्ञात

संबंधित सुफ़ी शायर

Recitation

बोलिए