Font by Mehr Nastaliq Web
Baba Farid's Photo'

बाबा फ़रीद

1173 - 1266 | कोथेवाल, पाकिस्तान

बारहवीं सदी के मुबल्लिग़ और सूफ़ी बुज़ुर्ग थे, उनको क़ुरून-इ-वुस्ता के सबसे मुमताज़ और क़ाबिल-ए-एहतिराम सूफ़िया में से एक कहा गया है, उनका मज़ार पाकपतन, पाकिस्तान में है

बारहवीं सदी के मुबल्लिग़ और सूफ़ी बुज़ुर्ग थे, उनको क़ुरून-इ-वुस्ता के सबसे मुमताज़ और क़ाबिल-ए-एहतिराम सूफ़िया में से एक कहा गया है, उनका मज़ार पाकपतन, पाकिस्तान में है

बाबा फ़रीद

कविता 6

सलोक 121

सूफ़ी उद्धरण 54

जैसे हो वैसे ही दिखो, वरना लोग तुम्हारी असलियत सामने ले आएँगे।

  • शेयर कीजिए

अगर ज़िंदगी है तो इल्म में है, अगर राहत है तो पहचान (मअरिफ़त) में है, अगर चाहत है तो मोहब्बत में है और अगर सुख है तो ज़िक्र में है।

  • शेयर कीजिए

ज़िंदा दिल वही है, जिसमें मोहब्बत और तड़प मौजूद हो।

  • शेयर कीजिए

दरवेश मर जाए, पर ख़ुद को संतुष्ट करने के लिए कभी क़र्ज़ ले, क्योंकि क़र्ज़ और ख़ुदा पर भरोसे में पूरब-पश्चिम का फ़र्क़ है।

  • शेयर कीजिए

रिवाज और किताबों से सीखा हुअ कुछ नहीं, असली चीज़ तो अच्छा किरदार है, उसी से इंसान को नजात मिलती है।

  • शेयर कीजिए

मल्फ़ूज़ 15

पुस्तकें 1

 

संबंधित ब्लॉग

 

संबंधित सुफ़ी शायर

Recitation

बोलिए