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फ़ज़ीहत शाह वारसी

- 1912 | गया, भारत

हाजी वारिस अ’ली शाह के मुरीद

हाजी वारिस अ’ली शाह के मुरीद

फ़ज़ीहत शाह वारसी के अशआर

बज़्म-ए-गुल में वो गुल-ए-’इज़ार नहीं

फ़स्ल-ए-गुल है मगर बहार नहीं

दीन-ओ-ईमान पर गिरी बिजली

लग गई आग पारसाई में

न बावर हो तो सूरा-यूसुफ़ पढ़ो

ख़ुदा की ज़बाँ पर है अज़़कार-ए-इ’श्क़

हमारे घर में आ कर यार अटका

रक़ीबों की नज़र में ख़ार अटका

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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