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मियाँ मीर क़ादरी

1550 - 1635 | लाहौर, पाकिस्तान

मियाँ मीर क़ादरी के सूफ़ी उद्धरण

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सूफ़ियों की मौत नफ़्स की मौत है। जब नफ़्स मरता है, तब वे हमेशा के लिए ज़िंदा हो जाते हैं।

सूफ़ी वो है, जो 'कुछ नहीं' हो जाए। अगर वो अब भी 'हो', तो उसे 'होना' नहीं चाहिए।

दुनिया से अलगाव (तजरीद) और तन्ही (तफ़रीद) लाज़मी हैं। जो तजरीद में कामिल हो जाता है, वह जल्दी ही अपना मक़सद को पा लेता है।

सूफ़ी जब वज्द में होता है, तो अपनी हस्ती से ख़ाली होता है और ख़ुदा उस में बाक़ी रहता है।

क्या आप जानते हैं कि राह-ए-तसव्वुफ़ की पहली शर्त क्या है? एक ही ठोकर में दोनों दुनियाओं को ठुकरा देना।

हक़ की तलब आसान नहीं। जब तक तुम हक़ की तलाश में अकेले नहीं हो जाते, तब तक उसे नहीं पा सकते।

जिस का ख़ुदा हो, वो फ़क़ीर नहीं।

शरीअत पे चलने से ही तरीक़त मिलती है और बुरी चीज़ों से दिल पाक हो जाता है। जिस से हक़ीक़त का पता चलता है। और कौन सी हक़ीक़त? वजूद को आसान बनाना और दिल को ख़ुदा के सिवा हर चीज़ से ख़ाली कर लेना।

लिबास ऐसा होना चाहिए कि कोई पहचान सके कि तुम तसव्वुफ़ की राह के मुसाफ़िर हो।

जब सूफ़ी कामिल हो जाता है और उस का दिल बुरे ख़यालात से पाक हो जाता है, तो कोई भी चीज़ उसे नुक़सान नहीं पहुँचा सकती। वह ख़ुद बादशाह बन जाता है और दुनिया के सभी बादशाह उस के मातहत हो जाते हैं।

जो इंसान एक पल के लिए भी ख़ुदा से ग़ाफ़िल हो जाए, वह दर-पर्दा रूप काफ़िर की मानिंद ही है।

अगर सारी दुनिया ख़ून और दौलत से भरी पड़ी हो, तब भी ख़ुदा का बंदा केवल हलाल चीज़ों के अलावा कुछ भी नहीं खाता।

फ़ुज़ूल बातों में मशग़ूल रहना इंसान को ख़ुदा की याद से गाफ़िल कर देता है।

सूफ़ियों का कमाल है कि वे मरने के बाद और ज़िंदगी में एक ही तरह के होते हैं, बल्कि मरने के बाद और कमाल के होते हैं।

सूफ़ी जब कामिल हो जाता है और उस का दिल हर ख़तरे से पाक हो जाता है, तो उसे किसी चीज़ से नुक़सान नहीं पहुँच सकता।

सच्चा सूफ़ी वो है, जिस की नज़र में पत्थर और नगीने बराबर हों। जो ख़ुदा के साथ होता है, उसे किसी की ज़रूरत नहीं।

इंसान में तीन चीज़ें होती हैं: नफ़्स (मन), दिल और रूह। नफ़्स की इस्लाह शरियत से, दिल की तरीक़त से और रूह की हक़ीक़त से होती है।

यदि किसी ने दुनिया को छोड़ दिया है लेकिन उस का एक भी ख़याल दुनियादारी की तरफ़ माइल है, तो तो उसे आज़ाद माना जा सकता है और ही ज़ाहिद। उस की अंदरूनी नापाकी अभी भी बाक़ी है।

Mansur Hallaj was tess chivalrous that he disclosed Divine secret. There are such people in the folk of Allah, that if they drink oceans of Truth, they keep quiet and would never belch.

Mansur Hallaj was tess chivalrous that he disclosed Divine secret. There are such people in the folk of Allah, that if they drink oceans of Truth, they keep quiet and would never belch.

Two guests cannot be accommodated in one house.

Two guests cannot be accommodated in one house.

He would seldom discourse on the subject of tauheed to the common men; rather he would never open arcane secrets of divinity to them. Mian Mir would often read the following couplet (translation only):- Talk of tauheed (Divine Unity) is like illusion. O Son! Who can be saturated by the illusion! If a vulgar talks about tauheed, what will he get except defame.

He would seldom discourse on the subject of tauheed to the common men; rather he would never open arcane secrets of divinity to them. Mian Mir would often read the following couplet (translation only):- Talk of tauheed (Divine Unity) is like illusion. O Son! Who can be saturated by the illusion! If a vulgar talks about tauheed, what will he get except defame.

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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