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नजीब लखनवी

- 1940

फ़िरंगी महल के आ’लिम-ए-दीन और ख़्वाजा अ’ज़ीज़ लखनवी के शागिर्द-ए-अ’ज़ीज़

फ़िरंगी महल के आ’लिम-ए-दीन और ख़्वाजा अ’ज़ीज़ लखनवी के शागिर्द-ए-अ’ज़ीज़

नजीब लखनवी के अशआर

कुदूरत-ए-दिल-ए-मा’शूक़-ए-गुल-ए-’इज़ार हूँ मैं

हवा उड़ा सके जिसको वो ग़ुबार हूँ मैं

तुफ़ैल-ए-आल-ए-मुहम्मद नजात होगी नजीब

सियाह-कार अगर और गुनाह-गार हूँ मैं

हुजूम-ए-दाग़-ए-मोहब्बत में लाला-ज़ार हूँ मैं

ख़िज़ां का ख़ौफ़ नहीं जिसको वो बहार हूँ मैं

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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