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Sufinama
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रूमी

1207 - 1273 | कोन्या, तुर्की

मशहूर फ़ारसी शाइ’र, मसनवी-ए-मा’नवी, फ़िहि माफ़ीह और दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी के मुसन्निफ़, आप दुनिया-भर में अपनी ला-ज़वाल तसनीफ़ मसनवी की ब-दौलत जाने जाते हैं, आपका मज़ार तुर्की में है ।

मशहूर फ़ारसी शाइ’र, मसनवी-ए-मा’नवी, फ़िहि माफ़ीह और दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी के मुसन्निफ़, आप दुनिया-भर में अपनी ला-ज़वाल तसनीफ़ मसनवी की ब-दौलत जाने जाते हैं, आपका मज़ार तुर्की में है ।

रूमी के अशआर

आरज़ू दारम कि मेहमानत कुनम

जान-ओ-दिल दोस्त क़ुर्बानत कुनम

गर तू अफ़लातून-ओ-लुक़मानी ब-इ'ल्म

मन ब-यक दीदार नादानत कुनम

हम सूरत-ए-आफ़ताब-ए-ज़ातम

हम मा'नी-ए-सिर्र-ए-कुन-फ़िकानम

हर कि आ’शिक़ दीदयश मा'शूक़-दाँ

कू ब-निसबत हस्त हम-ईन-ओ-हमाँ

ग़म म-देह आह म-देह जुज़ ब-तरब राह म-देह

आह ज़े-बे-राह बूवद रह ब-गुशा बार ब-देह

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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