Sufinama
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रूमी

1207 - 1273 | कोन्या, तुर्की

मशहूर फ़ारसी शाइ’र, मसनवी-ए-मा’नवी, फ़िहि माफ़ीह और दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी के मुसन्निफ़, आप दुनिया-भर में अपनी ला-ज़वाल तसनीफ़ मसनवी की ब-दौलत जाने जाते हैं, आपका मज़ार तुर्की में है ।

मशहूर फ़ारसी शाइ’र, मसनवी-ए-मा’नवी, फ़िहि माफ़ीह और दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी के मुसन्निफ़, आप दुनिया-भर में अपनी ला-ज़वाल तसनीफ़ मसनवी की ब-दौलत जाने जाते हैं, आपका मज़ार तुर्की में है ।

रूमी

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फ़ारसी कलाम 34

फ़ारसी सूफ़ी काव्य 24

रूबाई 6

सूफ़ी कहानी 121

सूफ़ी उद्धरण 132

At night, I open the window and ask the moon to come and press its face against mine. Breathe into me. Close the language door and open the love window. The moon won't use the door, only the window.

At night, I open the window and ask the moon to come and press its face against mine. Breathe into me. Close the language door and open the love window. The moon won't use the door, only the window.

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All people on the planet are children, except for a very few. No one is grown up except those free of desire.

All people on the planet are children, except for a very few. No one is grown up except those free of desire.

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Goodbyes are only for those who love with their eyes. Because for those who love with heart and soul there is no such thing as separation.

Goodbyes are only for those who love with their eyes. Because for those who love with heart and soul there is no such thing as separation.

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And you? When will you begin that long journey into yourself?

And you? When will you begin that long journey into yourself?

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The wound is the place where the Light enters you

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मल्फ़ूज़ 71

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अबुल ख़ैर

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ब-रोज़-ए-मर्ग चू ताबूत-ए-मन रवाँ बाशद

अहमद ज़ाहिर

बाज़ आमदम बाज़ आमदम अज़ पेश-ए-आँ-यार आमदम

कंकर एन्सेम्बल, अर्सलान कंकर

साक़ी-ए-फ़र्रूख़-ए-रुख़-ए-मन जाम चू गुलनार ब-देह

रहीम महरिया

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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