शाह मोहसिन दानापुरी के अशआर
ख़ुशी से दूर हूँ ना-आश्ना-ए-बज़्म-ए-इ’शरत हूँ
सरापा दर्द हूँ वाबस्ता-ए-ज़ंजीर-क़िस्मत हूँ
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ख़ुशी से दूर हूँ ना-आश्ना-ए-बज़्म-ए-इ’शरत हूँ
सरापा दर्द हूँ वाबस्ता-ए-ज़ंजीर-क़िस्मत हूँ
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टैग : क़िस्मत
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ग़ज़ब की चाल गुलशन में चला है बाग़बाँ 'मोहसिन'
इसी का ये नतीज: है कि पामाल-ए-सऊबत हूँ
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टैग : गुलशन
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere