शम्स साबरी के अशआर
ख़याल-ए-ख़ुदा में ख़ुदी को भुला कर
निशान-ए-ख़ुदा हम जमाए हुए हैं
-
टैग : ख़ुदा
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
कहाँ ‘शम्स’ बंदा कहाँ तू ख़ुदाया
ख़ुदा-ओ-ख़ुदी हम भुलाए हुए हैं
-
टैग : ख़ुदी
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
मुझे क़त्ल कर दिया बे-ख़तर ना किया ज़रा भी ख़ुदा का डर
तेरे इ’श्क़ में ये मिला समर ना इधर का रहा ना उधर का रहा
-
टैग : ख़ुदा
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
अब न अपना होश है मुझको न कुछ उस का ख़्याल
बे-ख़ुदी तारी है जब से हो गई रफ़्तार और
-
टैग : ख़ुदी
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
नहीं दीन-ओ-दुनिया का होश अब हूँ हिज्र में तेरी जाँ ब-लब
मुझे काटे खाता है अपना घर ना इधर का रहा ना उधर का रहा
-
टैग : घर
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere