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सूफ़ी लेख
चिश्तिया सिलसिला की ता’लीम और उसकी तर्वीज-ओ-इशाअ’त में हज़रत गेसू दराज़ का हिस्सा
ख़लीक़ अहमद निज़ामी
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क़िस्सा
क़िस्सा चहार दर्वेश
मुबारक से यह सुन कर बोला, ‘बहुत अच्छा, मैं यह चाहता हूँ कि वह बाक़ी न
अमीर ख़ुसरौ
सूफ़ी लेख
सतगुरू नानक साहिब
अब दर्याफ़्त शुरूअ’ हुई है तो लाओ ज़रा इत्मीनान-ए-क़ल्ब का रास्ता भी पूछ लें।ख़ुदा ने सब
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
हिन्दुस्तान में क़ौमी यक-जेहती की रिवायात-आ’ली- बिशम्भर नाथ पाण्डेय
मैंने पूछा कल्याण सिंह तुमने अपनी दो लाख की मालियत ख़ाक में मिलवा दी।शायद ज़िंदगी-भर की
मुनादी
सूफ़ी लेख
ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ - अबुल-आज़ाद ख़लीक़ी देहलवी
मसऊ’द था वो वक़्त जब ख़्वाजा ने हिन्दुस्तान में क़दम-ए-हुमायूँ रखा और मुबारक थी वो घड़ी
निज़ाम उल मशायख़
व्यंग्य
मुल्ला नसरुद्दीन- दूसरी दास्तान
बूढ़ा घबड़ाकर कराहने लगा। वह सोच नहीं पा रहा था कि उस की बरबादी की यह
लियोनिद सोलोवयेव
सूफ़ी लेख
पीर नसीरुद्दीन ‘नसीर’ महद से लहद तक
’’मुझे याद है कि मेरे शाइरी करने के बिल्कुल शुरुआती ज़माने में हज़रत पीर मेहर अली
रय्यान अबुलउलाई
सूफ़ी कहानी
कहानी-34- फ़क़ीरी गुलिस्तान-ए-सा’दी
एक आ’बिद बेचारा जंगल में रहता था और पेड़ों की पत्तियाँ खा खा कर गुज़ारा करता
सादी शीराज़ी
सूफ़ी लेख
हाजी वारिस अ’ली शाह का पैग़ाम-ए-इन्सानियत - डॉक्टर सफ़ी अहमद काकोरवी
उन्नीसवीं सदी का दौर है। अवध की फ़िज़ा ऐ’श-ओ-इ’श्रत से मा’मूर है। फ़ौजी क़ुव्वतें और मुल्की
मुनादी
सूफ़ी लेख
क़व्वाली और अमीर ख़ुसरो – अहमद हुसैन ख़ान
मुश्ते नमूना अज़ ख़रवारे, इन हवालों के अ’लावा मुतअ’द्दिद वाक़िआ’त गाने के जवाज़ में मिलते हैं।फिर
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी साहित्य
इल्म-ए-लदुन्नी
रूह-ए-हैवानी जिस्म-ए-लतीफ़ है।गोया रौशन चराग़ है जो दिल के शीशे में रखा हुआ है।इस से मेरी