अहक़र बिहारी के अशआर
उम्मीद नहीं अब कश्ती-ए-दिल साहिल पे सलामत जा पहुँचे
दरिया-ए-अलम भी बाढ़ पे है अश्कों की जुदा तुग़्यानी है
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टैग : उम्मीद
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ये राज़ की बातें हैं इस को समझे तो कोई क्यूँकर समझे
इंसान है पुतला हैरत का मजबूर भी है मुख़्तार भी है
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टैग : इंसान
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कुछ फ़िक्र तुम्हें उक़्बा की नहीं 'अहक़र' ये बड़ी नादानी है
दुनिया की ख़ुशी क्या ईज़ा क्या ये हादिस है वो फ़ानी है
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टैग : ख़ुशी
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ये इ’श्क़ की है सरकार 'अहक़र' गु़स्सा भी यहाँ है प्यार भी है
हर ज़ख़्म-ए-जिगर के फाहे में काफ़ूर भी है ज़ंगार भी है
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टैग : इश्क़
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उम्मीद नहीं अब कश्ती-ए-दिल साहिल पे सलामत जा पहुँचे
दरिया-ए-अलम भी बाढ़ पे है अश्कों की जुदा तुग़्यानी है
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टैग : कश्ती
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कुछ फ़िक्र तुम्हें उक़्बा की नहीं 'अहक़र' ये बड़ी नादानी है
दुनिया की ख़ुशी क्या ईज़ा क्या ये हादिस है वो फ़ानी है
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टैग : ख़्वाब
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हैरान है तेरे मज़हब से सब गबरू मुसलमाँ ऐ 'अहक़र'
ये उस की गली का रस्ता है पुर-ख़ौफ़ भी है पुर-ख़ार भी
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टैग : ख़ौफ़
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दिखाइए आज रू-ए-ज़ेबा उठाइए दरमियाँ से पर्दा
कहाँ से अब इंतिज़ार-ए-फ़र्दा यही तो सुनते हैं उम्र-भर से
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टैग : इंतिज़ार
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डरता ही रहे इंसाँ इस से उम्मीद गर है बख़्शिश की
हैं नाम इसी के ये दोनों ग़फ़्फ़ार भी है क़हहार भी है
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टैग : उम्मीद
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खिंची है शमशीर-ए-नाज़ क़ातिल चले हैं मुश्ताक़-ए-मर्ग घर से
कफ़न लपेटे हुए कमर से कोई इधर से कोई उधर से
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क़ाबू में दिल-ए-नाकाम रहे राज़ी-ब-रज़ा इंसान रहे
हंगाम-ए-मुसीबत घबराना इक तर्ह की ये नादानी है
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टैग : इंसान
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जब बाग़-ए-जिनाँ में बू तेरी ऐ रौनक़-ए-गुलशन फैल गई
बुलबुल ने गुलों से मुँह मोड़ा फूलों ने चमन को छोड़ दिया
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टैग : गुलशन
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere