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Hairat Shah Warsi's Photo'

हैरत शाह वारसी

1887 - 1963 | कराची, पाकिस्तान

हैरत शाह वारसी के अशआर

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फ़स्ल-ए-बहार में तो क़ैद-ए-क़फ़स में गुज़री

छूटे जो अब क़फ़स से तो मौसम-ए-ख़िज़ाँ है

मिरी 'हैरत' मोहब्बत हो मोहब्बत आप की 'हैरत'

यही आईना-दारी आख़िरश रोज़-ए-यकीं आए

दिल में जो रहते थे उम्मीद की दुनिया हो कर

वो चले जाते हैं क्यूँ दाग़-ए-तमन्ना हो कर

मुद्दत में जल्वा-गर हुए बाला-ए-बाम वो

उस चाँद को मैं देखूँ कि देखूँ क़मर को मैं

सीने में बन के हसरत इक तीर बे-कमाँ है

जब तक रहे ये दिल में इंसान नीम-जाँ है

'हैरत' कि तुझ को हैरत-ए-दीदार हो नसीब

देख ले तू शान-ए-ख़ुदा हुस्न-ए-यार में

बस में तिरे ज़मीं है क़ब्ज़े में आसमाँ है

दो-जहाँ के मालिक मेरा निशाँ कहाँ है

हर ज़र्रा उस की मंज़िल सहरा हो या हो गुलशन

क्यूँ बे-निशाँ रहे वो तेरा जो बे-निशाँ है

कश्ती-ए-उ’म्र मिरी ग़म के है तूफ़ाँ में घिरी

खींच लो अब उसे दरिया का किनारा हो कर

क़िस्मत की ना-रसाइयाँ बा'द-ए-फ़ना रहीं

मर के भी दफ़्न हो सका कू-ए-यार में

मेरे आक़ा मेरे मुर्शिद 'बेदम'-ए-अली-जनाब

दर-हक़ीक़त आसमान-ए-वारसी के आफ़्ताब

मेरा घर घर नहीं तुम बिन ये सियह-ख़ानः है

अब सियह-ख़ाने में जाओ उजाला हो कर

आप की तस्वीर हर-दम दिल से हम-आग़ोश है

या'नी वो बेहोश हूँ क़ुर्बान जिस पर होश है

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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