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सूफ़ियाना शे’र कहने वाला एक आ’लमी शाइ’र और मुसन्निफ़

सूफ़ियाना शे’र कहने वाला एक आ’लमी शाइ’र और मुसन्निफ़

जामी

फ़ारसी कलाम 45

फ़ारसी सूफ़ी काव्य 19

रूबाई 18

बैत 8

सूफ़ी उद्धरण 23

ख़ुदा ने इंसान के अंदर दो दिल नहीं बनाए, उसने तुम्हारे अंदर सिर्फ़ एक दिल रखा है, ताकि तुम एक ही दिल से सिर्फ़ उसी से मुहब्बत करो और हर ‘ग़ैर’ से मुँह फेर लो और ख़ुद को उसकी इबादत के लिए वक़्फ़ कर दो और अपने दिल को सौ टुकड़ों में बाँटने से बचे रहो।

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जो दिल मुहब्बत की बीमारी से आशना न हो, वो दिल हीं नहीं। जो जिस्म इश्क़ के दुखों से आशना नहीं, वो जिस्म कुछ नहीं गीली मिट्टी है।

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महान उस्तादों के शागिर्दों के सामने सब से बड़ा ख़तरा यह होता है कि वे सारे उस्ताद की परस्तिश करने लगते हैं। जबकि इस के बजाय उन्हें उस्ताद से सीखे उसूलों पर ज़िंदगी गुज़ारनी चाहिए।

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इंसानी सिफ़ात, ज़ाहिरी सूरत में ख़ुदा की सिफ़ात ही हैं। इंसानी सिफ़ात ख़ुदा के साथ ऐसे जुड़ी हैं, जैसे कि कुल के साथ उस का जुज़ जुड़ा होता है। सच्चा विसाल ये है कि इंसान बाक़ी सब कुछ छोड़कर सिर्फ़ उस एक यग़ाना के मुराक़बे में पूरी तरह डूब जाए।

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जब सच्चा तलबगार अपने अंदर इलाही कशिश की शुरुआत महसूस करता है, वह शुरुआत जो कि हक़ के ख़याल के सुरूर के रूप में होती है। तो उसे चाहिए कि वो इस अनुभव को बढ़ाने और मज़बूत बनाने में जी-जान झोंक दे और इस के साथ ही उन सारी चीज़ों को छोड़ जो इस के ख़िलाफ़ हों।

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ना'त-ओ-मनक़बत 3

 

पुस्तकें 8

 

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