सुलेमान शिकोह गार्डनर के अशआर
क्या ग़म जो टूट जाएँ जिगर, जाँ, कलेजा, दिल
पर तेरी चाह की न तमन्ना शिकस्त हो
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सूरत-नुमा हो इ’श्क़ तिरा फिर कहाँ, अघर
आईना-ए-जमाल-ए-सरापा शिकस्त हो
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नाज़-ए-गुल का शहीद है जो ‘फ़ना’
क़ब्र पर गुलरुखों का मेला है
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टैग : क़ब्र
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डूबी जाती है नाव हस्ती की
मौज-ए-गिर्या का ज़ोर रेला है
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टैग : गिर्या-ओ-ज़ारी
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नाज़-ए-गुल का शहीद है जो ‘फ़ना’
क़ब्र पर गुलरुखों का मेला है
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टैग : गुल
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बेशक ख़ुदा बने जो ‘फ़ना’ तोड़े अब्दियत
ख़ुद-बीनियों का अपनी जो पाया शिकस्त हो
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टैग : ख़ुदा
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere