बेख़ुद सुहरावरदी के अशआर
‘अयाज़’ इक बेश-क़ीमत सा तुझे नुक्ता बताता हूँ
तुम अपने आपको समझो ख़ुदा क्या है ख़ुदा जाने
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ज़िंदगी को बेच डाला बे-ख़ुदी के जाम पर
एक ही साग़र से दिल की तिश्नगी जाती रही
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टैग : ख़ुदी
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ख़ुशी से चोट खाने का मज़ा या कैफ़-ए-जाँ-सोज़ी
कोई जाँ-सोज़ परवाना या कोई दिल-जला जाने
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टैग : ख़ुशी
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रिंद हूँ ब-ख़ुदा मगर ‘बेख़ुद’ हूँ बे-ख़ुदा नहीं
तुम ही मेरे हो पेशवा या’नी कि ना-ख़ुदा भी तुम
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टैग : ख़ुदा
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लबों पर नाम ना आँसू हिकायत ना शिकायत हो
असीर-ए-ज़ुल्फ़ दीवाना है दीवाना ये क्या जाने
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टैग : असीर
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लबों पर नाम ना आँसू हिकायत ना शिकायत हो
असीर-ए-ज़ुल्फ़ दीवाना है दीवाना ये क्या जाने
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टैग : आँसू
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जब तक एक हसीं मकीं था दिल में हर-सू फूल खिले थे
वो उजड़ा तो गुलशन उजड़ा और हुआ आबाद नहीं है
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टैग : गुलशन
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere