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ख़ादिम हसन अजमेरी

1894 - 1970 | अजमेर, भारत

ख़ादिम हसन अजमेरी

ग़ज़ल 1

 

कलाम 6

फ़ारसी सूफ़ी काव्य 3

 

सूफ़ी पत्र 14

ना'त-ओ-मनक़बत 16

सलाम 1

 

मुख़म्मस 2

 

वीडियो 8

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अज़ल में जो सदा मैं ने सुनी थी कैफ़-ए-मस्ती में

राजु मुर्ली

क्यूँ न अश्क-बार हुआ करूँ क्यूँ न बे-क़रार रहा करूँ

हाजी महबूब अ'ली

जो राह-ए-’इश्क़ में गुम हो गया है

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शर्मिंदा कर रही है मिरी हर ख़ता मुझे

अज्ञात

शर्मिंदा कर रही है मिरी हर ख़ता मुझे

अज्ञात

हम शिकवा करना क्या जानें हम नाज़ उठाने वाले हैं

अज्ञात

हाजत है मय-कदा की न मतलूब-ए-जाम है

अज्ञात

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