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अज्ञात के सूफ़ी शब्दावली
मुग़्बचा
(शराब पिलाने वाले का लड़का) ׃साधक जब सांसारिक कामनाओं एवं इच्छाओं से विमुक्त हो जाता है, तो उसके हृदय को ‘मुगबचा’ कहते हैं.
मंज़िल
(निर्दिष्ट स्थान; पड़ाव) ׃तसव्वुफ़ के मार्ग में सूफ़ियों को विभिन्न आध्यात्मिक स्थानों को पार करना पड़ता है. ये ही स्थान तसव्वूफ़ की अनेक मंज़िलें अथवा मक़ाम कहलाते हैं. कई सूफ़ी-साधक परमात्मा तक पहुँचने की सात मंज़िलें मानते हैं, कई चार और कई बारह मानते
मज्ज़ूब
(खींचा हुआ, ख़ुदा के इश्क़ में खींचा हुआ, आपे से गुज़रा हुआ) ׃ वह सूफ़ी जो जज़्बा-ए-इलाही (प्रभुआकर्षण) में सर्वस्व त्याग चुका हो और जिस का आध्यात्मिक प्रेम पराकाष्ठा तक पहुँच चुका हो, ऐसे साधक को किसी शैख़ (गुरु) की आवश्यकता भी नहीं रहती।
कस्रत
(प्राचुर्य, अधिकता) ׃ ईश्वर की अभिव्यक्ति के मर्तबों को ‘कस्रत’ कहते हैं; वाहिदियत का दर्जा, आलम-ए-अरवाह, आलम-ए-मिसाल, आलम-ए-अज्साम ये सब ‘आलम-ए-कस्रत’ हैं।