Sufinama
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पुरनम इलाहाबादी

1940 - 2009 | लाहौर, पाकिस्तान

“भर दो झोली मेरी या मुहम्मद” लिखने वाले कवी

“भर दो झोली मेरी या मुहम्मद” लिखने वाले कवी

पुरनम इलाहाबादी

ग़ज़ल 9

शे'र 52

कलाम 4

 

रूबाई 1

 

वीडियो 8

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इस शान-ए-करम का क्या कहना दर पे जो सवाली आते हैं

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

तुम्हें दिल-लगी भूल जानी पड़ेगी मोहब्बत की राहों में आ कर तो देखो

तुम्हें दिल-लगी भूल जानी पड़ेगी मोहब्बत की राहों में आ कर तो देखो

राहत फ़तेह अली ख़ान

तुम्हें दिल-लगी भूल जानी पड़ेगी मोहब्बत की राहों में आ कर तो देखो

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

तुम्हें दिल-लगी भूल जानी पड़ेगी मोहब्बत की राहों में आ कर तो देखो

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

दस्तूर मोहब्बत का सिखाया नहीं जाता

राहिल फ़ारूक़

भर दो झोली मेरी या मोहम्मद लौट कर मैं न जाऊँगा ख़ाली

साबरी ब्रदर्स

भर दो झोली मेरी या मोहम्मद लौट कर मैं न जाऊँगा ख़ाली

साबरी ब्रदर्स

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI