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सादी शीराज़ी

1210 - 1291 | शिराज़, ईरान

ईरान के एक बड़े मुअ’ल्लिम, आपकी दो किताबें गुल्सिताँ और बोस्ताँ बहुत मशहूर हैं, पहली किताब नस्र में है जबकि दूसरी किताब नज़्म में है

ईरान के एक बड़े मुअ’ल्लिम, आपकी दो किताबें गुल्सिताँ और बोस्ताँ बहुत मशहूर हैं, पहली किताब नस्र में है जबकि दूसरी किताब नज़्म में है

सादी शीराज़ी

फ़ारसी कलाम 18

फ़ारसी सूफ़ी काव्य 4

 

सूफ़ी कहानी 244

बैत 80

सूफ़ी उद्धरण 93

अगर किसी को थोड़ा खाने की आदत है, तो वो सख़्ती के दिन आसानी से गुज़ार सकता है और अगर उसे ख़ुशहाली के दिनों में अपना पेट भरना हो, तो वो ज़्यादा ग़रीबी से मरता है।

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अगर किसी फ़क़ीर के पास एक रोटी होती है, तो वो आधी रोटी ख़ुद खाता है और आधी किसी ग़रीब को दे देता है, लेकिन अगर किसी बादशाह के पास एक मुल्क होता है, तो उसे एक और मुल्क की चाहत होती है।

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जब शराब इन्सान के अंदर दाख़िल होती है, तो अक़्ल को बाहर निकाल देती है।

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तू हज को जाए और जाते हुए हर पड़ाव पर एक हज़ार रकअत नमाज़ पढ़ता जाए, इस से बेहतर काम ये है कि तू किसी भी एक शख़्स की तक़लीफ़ दूर कर दे।

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बुरे कामों से परहेज़ करना, इंसान के लिए भलाई और हिफ़ाज़त की वजह है। ऐसे नेक इंसान को इस ज़िंदगी में ही निजात मिल जाती है। उस का जीवन मानो अमर हो जाता है।

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क़िता' 1

 

पुस्तकें 25

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