संजर ग़ाज़ीपुरी के अशआर
आँख मिलते ही किसी मा'शूक़ से
फिर तबीअ'त क्या सँभाली जाएगी
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दहर-ए-फ़ानी में हँसी कैसी ख़ुशी क्या चीज़ है
रोने आए थे यहाँ दो-चार दिन को रो गए
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झूलो झूलना मुहम्मद बीबी-आमना के लाल
हुस्न है दिलकश अदा निराली
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रुक गए आँसू मिरे दर्द-ए-जिगर कुछ कम हुआ
इस बुत-ए-सीमीं-बदन का जब नज़ारा हो गया
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आह उस पर्दा-नशीं की जुस्तुजू में जो गए
कुछ पता पाया न उसका ख़ुद ही जा कर खो गए
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जब ख़ुदा से लो लगाई जाएगी
फिर दु’आ कब कोई ख़ाली जाएगी
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जब ख़ुदा से लो लगाई जाएगी
फिर दुआ कब कोई ख़ाली जाएगी
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दहर-ए-फ़ानी में हँसी कैसी ख़ुशी क्या चीज़ है
रोने आए थे यहाँ दो-चार दिन को रो गए
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टैग : ख़्वाब
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जो माँगना हो ख़ुदा से माँगो उसी से बख़्शिश की इल्तिजा हो
गुनाह ढल कर हो पानी पानी सँभल के चलिये क़दम क़दम पर
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टैग : इल्तिजा
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ख़्वाजा तोरी सूरत पे मैं वारी
नूरी प्रेम अदा पे मैं वारी
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टैग : अदा
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जो आ’शिक़ हैं तेरे तड़पते नहीं हैं
कभी आह-ओ-नाले वो करते नहीं हैं
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टैग : आ’शिक़
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इ’श्क़ में इस शो'लः-रू के ऐसे बे-ख़ुद हो गए
आप भी आने न पाए थे की आख़िर खो गए
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टैग : इश्क़
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ग़ैर मुँह तकता रहा मैं अर्ज़-ए-मतलब कर चुका
मुझ से उन से आँखों आँखों में इशारः हो गया
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नेक-ओ-बद दो ही अमल जाते हैं दम के साथ साथ
क़ब्र में शामिल मेरे ये बन के रहबर दो गए
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टैग : क़ब्र
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इ’श्क़ तेरा जो ऐ दिलरुबा हो गया
था जो क़िस्मत का लिखा अदा हो गया
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टैग : अदा
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रंग लाएगा मिरा सोज़-ए-मोहब्बत क़ब्र में
उस्तुख़्वाँ हो जाएगा शो'ले कफ़न जल जाएगा
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ये हैं ख़ून-ए-बिस्मिल की धारें ऐ क़ातिल
तिरी आँखों में सुर्ख़ डोरे नहीं हैं
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टैग : क़ातिल
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सख़्त-जाँ 'संजर' हुआ है इ’श्क़ में
तेग़ अब क़ातिल की ख़ाली जाएगी
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दिल अपना मुहम्मद का काशाना बना डाला
उजड़े हुए इस घर को शाहाना बना डाला
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टैग : घर
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जो माँगना हो ख़ुदा से माँगो उसी से बख़्शिश की इल्तिजा हो
गुनाह ढल कर हो पानी पानी सँभल के चलिये क़दम क़दम पर
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere