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फ़ना बुलंदशहरी

- 1986 | कराची, पाकिस्तान

हिंद-ओ-पाक के मक़बूल-ए-ज़माना शाइ’र

हिंद-ओ-पाक के मक़बूल-ए-ज़माना शाइ’र

फ़ना बुलंदशहरी

ग़ज़ल 49

शे'र 53

कलाम 35

रूबाई 7

बैत 3

 

ना'त-ओ-मनक़बत 19

क़िता' 3

 

वीडियो 47

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नुसरत फ़तेह अली ख़ान

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

अब कितनी हसीं मेरी 'इबादत की घड़ी है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

अब देख के जी घबराता है सावन की सुहानी रातों को

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

अल्लाह ने कैसा शह-ए-ज़ीशान बनाया

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

आ भी जा रुत बदल जाएगी

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

आँख उट्ठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली दिल का सौदा हुआ चाँदनी रात में

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

आग दामन में लग जाएगी दिल में शो'ला मचल जाएगा

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

ऐ ख़त्म-ए-रुसुल मक्की मदनी कौनैन में तुम सा कोई नहीं

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

ऐ सरवर-ए-दुनिया-ओ-दीं तेरी निराली शान है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

ऐसा बनना सँवरना मुबारक तुम्हें कम से कम इतना कहना हमारा करो

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

क्या था जो घड़ी-भर को तुम लौट के आ जाते

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

काली कमली में जो ज़ीशान नज़र आता है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

किस दर्जा बुलंदी पे क़िस्मत का सितारा है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

ख़ुदा का नूर तुझ में हू-बहू है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ हामी-ए-बे-कसाँ इल्तिजा सुन लो शाह-ए-उमम के लिए

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

जाग उठेंगे दर्द पुराने ज़ख़्मों की अँगनाई में

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

झुका के सर तेरे आस्ताँ पर मुझे हर इक मुद्द'आ मिला है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

झूम रहा है चिश्ती गुलशन रंग-ए-फ़रीदी छाए हैं

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

तू अगर बे-नक़ाब हो जाए

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

तेरे क़ुर्बान प्यारे मोहम्मद गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालो

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

तेरे दरवाज़े पे चिलमन नहीं देखी जाती

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

दिल में जमाए बैठे हैं नक़्शा फ़रीद का

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

दिल है बे-ख़ुद सँभाले न सँभले होश में मुझ से आया न जाए

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

फिरूँ ढूँडता मय-कदा तौबा तौबा मुझे आज-कल इतनी फ़ुर्सत नहीं है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

बोतल खुली है रक़्स में जाम-ए-शराब है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

मैं ख़ुदा की सना गाऊँगा

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

मय-कदा बन गईं मस्त आँखें ज़ुल्फ़ काली घटा हो गई है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

मिल गया उनका दर बस और क्या चाहिए

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

मोरी सुध-बुध बिसरी ऐ सखियो मैं बोल रही ख़्वाजा ख़्वाजा

साबरी ब्रदर्स

या-नबी नूर हो तुम जल्वा-ए-यज़्दाँ की क़सम

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

सर झुकाया तो पत्थर सनम बन गए 'इश्क़ भटका तो ख़ुद आश्ना हो गया

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

है कहाँ का इरादा तुम्हारा सनम किस के दिल को अदाओं से बहलाओगे

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

हरम है क्या चीज़ दैर क्या है किसी पे मेरी नज़र नहीं है

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

हो निगह-ए-करम या मोहम्मद मेरा बिगड़ा हुआ है क़रीना

नुसरत फ़तेह अली ख़ान

ऐ सनम तुझ को हम भुला न सके

ज़की अज़हरी

किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आश्ना नहीं

वखरा मलंग

दुनिया के हर ख़याल से बेगाना कर दिया

राहिल फ़ारूक़

मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया

अनिता सिंघ्वी

मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया

राहत फ़तेह अली ख़ान

मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया

जुनैद असग़र

हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जिला होती है

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