बह्ज़ाद लखनवी के अशआर
ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ
मगर हाँ दिल में कुछ कुछ ज़ेर-ओ-बम महसूस करता हूँ
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टैग : ग़म
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तिरे इ’श्क़ में ज़िंदगानी लुटा दी
अजब खेल खेला जवानी लुटा दी
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ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ
मगर हाँ दिल में कुछ कुछ ज़ेर-ओ-बम महसूस करता हूँ
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टैग : ख़ुशी
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उन को बुत समझा था या उन को ख़ुदा समझा था मैं
हाँ बता दे ऐ जबीन-ए-शौक़ क्या समझा था मैं
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टैग : ख़ुदा
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हम ने तो ग़म को सीने से अपने लगा लिया
ग़म ने हमें शिकार किया हाए क्या किया
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टैग : ग़म
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उन के सितम भी सह के न उन से किया गिला
क्यूँ जब्र इख़्तियार किया हाए क्या किया
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टैग : जब्र
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उन को बुत समझा था या उन को ख़ुदा समझा था मैं
हाँ बता दे ऐ जबीन-ए-शौक़ क्या समझा था मैं
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टैग : ख़ुदा
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तुम्हीं पर से 'बहज़ाद' ने बे-ख़ुदी में
क्या दिल तसद्दुक़ जवानी लुटा दी
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टैग : ख़ुदी
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ये दिल में है जो घबराहट ये आँखों में है जो आँसू
इस एहसाँ को भी बाला-ए-करम महसूस करता हूँ
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टैग : आँसू
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क़िस्मत ने आह हम को ये दिन भी दिखा दिए
क़िस्मत पे ए'तिबार किया हाए क्या किया
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टैग : क़िस्मत
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सय्याद की रज़ा ये हम आँसू न पी सके
उ’ज़्र-ए-ग़म-बहार किया हाए क्या किया
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टैग : आँसू
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मिटने का ग़म नहीं है बस इतना मलाल ही
क्यूँ तेरा इंतिज़ार किया हाए क्या किया
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टैग : इंतिज़ार
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काफ़िर की चश्म-ए-नाज़ पे क्या दिल-जिगर का ज़िक्र
ईमान तक निसार किया हाए क्या किया
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टैग : ईमान
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere