एहसनुल्लाह ख़ाँ बयान के अशआर
वो कि इक मुद्दत तलक जिस को भला कहता रहा
आह अब किस मुँह से ज़िक्र उस की बुराई का करूँ
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ख़ूब सी तंबीह करना ऐ जुदाई तू मुझे
गर किसी से फिर कभी क़स्द आश्नाई का करूँ
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और भी उन ने 'बयाँ' ज़ुल्म कुछ अफ़्ज़ूद किया
किया उस शोख़ से तीं इश्क़ का इज़हार अबस
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दिल हमारा कि घर ये तेरा था
क्यूँ शिकस्त इस मकान पर आई
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होते ही सुब्ह आह गया माह-ए-चार-दह
साबित हुआ मुझे कि नमक है अ'दू-ए-शीर
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दु’आ कह कर चला बंदा सलाम आ कर करेगा फिर
ख़त आवे जब तलक तो बंदगी से ख़ूब जाता है
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आप को हम ने खो दिया है 'बयाँ'
आह किस का सुराग़ रखते हैं
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जा कहे कू-ए-यार में कोई
मर गया इंतिज़ार में कोई
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वो कौन दिन है कि ग़ैरों को ख़त नहीं लिखता
क़लम के बन को लगे आग और जले काग़ज़
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चराग़-ए-गोर न शम-ए-मज़ार रखते हैं
बस एक हम ये दिल-ए-दाग़दार रखते हैं
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उस दूध का ख़ुदा करे कासः हमें नसीब
जन्नत में पंज-तन की जो बहती है जू-ए-शीर
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मारा है 'बयाँ' को जिन ने ऐ शोख़
क्या जानिए कौन सी अदा थी
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टैग : अदा
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फ़रहाद पे इस क़दर न था ज़ुल्म
मजनूँ पे न ये ग़ज़ब जफ़ा थी
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तेरे दाग़ों की दौलत ऐ गुल-रू
हम भी सीने में बाग़ रखते हैं
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मैं तिरे डर से रो नहीं सकता
गर्द-ए-ग़म दिल से धो नहीं सकता
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टैग : ग़म
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जो ज़मीं पर फ़राग़ रखते हैं
आसमाँ पर दिमाग़ रखते हैं
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टैग : आसमान
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जूँ मिसाल उस की नुमूदार हुई तूँ ही 'बयाँ'
तपिश-ए-दिल ने किया ख़्वाब से बेदार मुझे
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टैग : ख़्वाब
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टुक शिकायत की अब इजाज़त हो
नहीं रुकती ज़बान पर आई
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क्या मिरी आँख अदम बीच लगी थी ऐ चर्ख़
क्या उस ख़्वाब से तू ने मुझे बेदार अ’बस
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न फ़क़त यार बिन शराब है तल्ख़
ऐश-ओ-आराम-ओ-ख़ुर्द-ओ-ख़्वाब है तल्ख़
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क़यामत आ चुकी दीदार-ए-हक़ हुआ सब को
हम अब तलक भी तिरा इंतिज़ार रखते हैं
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दिल बुझा जाए है अग़्यार की शोरिश पे मिरा
सर्द करती है तिरी गर्मी-ए-बाज़ार मुझे
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फ़रहाद किस उम्मीद पे लाता है जू-ए-शीर
वाँ ख़ून की हवस है नहीं आरज़ू-ए-शीर
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हाजत-ए-शम्अ क्या है तुर्बत पर
हम कि दिल सा चराग़ रखते हैं
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हर हुस्न-ए-अदा है तेरी अदा है तेरी हक़ीक़त कुन से जुदा
आ’शिक़ है तिरी सूरत पे ख़ुदा ऐ नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह
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ये आरज़ू है कि वो नामा-बर से ले काग़ज़
बला से फाड़ के फिर हाथ में न ले काग़ज़
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ग़ैर के आगे दिल की बात 'बयाँ'
आह मेरी ज़बान पर आई
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शब मिरा शोर-ए-गिर्या सुन के कहा
मैं तो इस ग़ुल में सो नहीं सकता
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टैग : गिर्या-ओ-ज़ारी
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क्या मिरी आँख अदम बीच लगी थी ऐ चर्ख़
क्या उस ख़्वाब से तू ने मुझे बेदार अ’बस
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टैग : आँख
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere