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मुज़्तर ख़ैराबादी के अशआर
वही अब बा'द-ए-मुर्दन क़ब्र पर आँसू बहाते हैं
न आया था जिन्हें मेरी मोहब्बत का यक़ीं बरसों
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टैग : आँसू
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मिरी तुर्बत पे ख़ुद साक़ी ने आ कर ये दुआ माँगी
ख़ुदा बख़्शे बहुत अच्छी गुज़ारी मय-परस्ती में
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टैग : ख़ुदा
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न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ
जो किसी के काम न आ सकी मैं वो एक मुश्त-ए-ग़ुबार हूँ
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टैग : आँख
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मोहब्बत बुत-कदे में चल के उस का फ़ैसला कर दे
ख़ुदा मेरा ख़ुदा है या ये मूरत है ख़ुदा मेरी
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टैग : ख़ुदा
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तुम सलामत रहो क़यामत तक
और क़यामत ख़ुदा करे कि न हो
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टैग : ख़ुदा
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मैं अँधेरी गोर हूँ और तू तजल्ली तूर की
रौशनी दे जा चराग़-ए-रू-ए-जानान: मुझे
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टैग : अँधेरा
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'मुज़्तर' उस ने सवाल-ए-उल्फ़त पर
किस अदा से कहा ख़ुदा न करे
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टैग : अदा
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कुछ ऐसा दर्द शोर-ए-क़ल्ब-ए-बुलबुल से निकल आया
कि वो ख़ुद रंग बन कर चेहरः-ए-गुल से निकल आया
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टैग : गुल
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नहीं देता जो मय अच्छा न दे तेरी ख़ुशी साक़ी
प्याले कुछ हमेशा ताक़ पर रखे नहीं रहते
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टैग : ख़ुशी
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ये वो बदला है संग-ए-आस्ताँ की जबहा-साई का
कि आए और मेरी क़ब्र पर अपनी जबीं रख दी
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टैग : क़ब्र
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दोई जा के रंग-ए-सफ़ा रह गया
ख़ुदी मिटते मिटते ख़ुदा रह गया
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टैग : ख़ुदा
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जुदाई में ये धड़का था कि आँच उन पर न आ जाये
बुझाई आँसुओं से हम ने आह-ए-आतिशीं बरसों
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टैग : जुदाई
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वही अब बा'द-ए-मुर्दन क़ब्र पर आँसू बहाते हैं
न आया था जिन्हें मेरी मोहब्बत का यक़ीं बरसों
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टैग : क़ब्र
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वो पहली सब वफ़ाएँ क्या हुईं अब ये जफ़ा कैसी
वो पहली सब अदाएँ क्या हुईं अब ये अदा क्यूँ है
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टैग : अदा
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क़नाअत दूसरे के आसरे का नाम है 'मुज़्तर'
ख़ुदा है जो कोई हद्द-ए-तवक्कुल से निकल आया
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टैग : ख़ुदा
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डूब जाने की हिदायत जो कभी मौज ने दी
आँख देने को हबाब-ए-लब-ए-दरिया निकला
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टैग : आँख
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ठहरना दिल में कुछ बेहतर न जाना
भरे घर को उन्होंने घर न जाना
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टैग : घर
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मोहब्बत इब्तिदा में कुछ नहीं मा’लूम होती है
मगर फिर दुश्मन-ए-ईमान-ओ-दीं मालूम होती है
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टैग : ईमान
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नहीं ये कहता मैं तुझ से क़ासिद कि उन से बे-वक़्त हाल कह दे
मगर जो पहलू नज़र से गुज़रे तो उस से पहलू-तही न करना
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टैग : क़ासिद
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किसी बुत की अदा ने मार डाला
बहाने से ख़ुदा ने मार डाला
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टैग : ख़ुदा
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ख़ुदा जाने मिरी मिट्टी ठिकाने कब लगे 'मुज़्तर'
बहुत दिन से जनाज़ा कूचा-ए-क़ातिल में रक्खा है
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टैग : ख़ुदा
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ख़ुदा जाने मिरी मिट्टी ठिकाने कब लगे 'मुज़्तर'
बहुत दिन से जनाज़ा कूचा-ए-क़ातिल में रक्खा है
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टैग : ख़ुदा
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बुतों से हम हुसूल-ए-सब्र की उम्मीद क्यूँ रखें
ये क्या देंगे ख़ुदा के पास से ख़ुद ना-सुबूर आए
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टैग : उम्मीद
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इस से पहले आँख की पुतली की क्या औक़ात थी
तेरे नुक़्ता देते ही क्या क्या नज़र आने लगा
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टैग : आँख
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मुझे नाशाद कर के आसमाँ राहत न पाएगा
मुझे बर्बाद कर के ख़ाक छानेगी ज़मीं बरसों
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टैग : आसमान
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ऐ इ’श्क़ अता कर दे ऐसा मुझे काशाना
जो का'बे का का'बा हो बुत-ख़ाने का बुत-ख़ाना
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टैग : इश्क़
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बिगाड़ क़िस्मत का क्या बताऊँ जो साथ मेरे लगी हुई है
कहीं कहीं से कटी हुई है कहीं कहीं से मिटी हुई है
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टैग : क़िस्मत
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हमारी तुर्बत पे तुम जो आना तो साथ अग़्यार को न लाना
ख़ुशी के सदमे हमें न देना हमारे ग़म की ख़ुशी न करना
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टैग : ख़ुशी
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मोहब्बत में जुदाई का मज़ा 'मुज़्तर' न जाने दूँ
वो बुलबुल हूँ कि गुल पाऊँ तो पत्ता दरमियाँ रक्खूँ
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टैग : जुदाई
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इक राज़ है ऐ 'मुज़्तर' तुर्बत का अंधेरा भी
आई है पए मातम का'बे की सियह-पोशी
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टैग : अँधेरा
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आप आएँ तो सही ठोकर लगाने के लिए
मेरी तुर्बत देख कर आँसू रवाँ हो जाएँगे
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टैग : आँसू
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तलाश-ए-बुत में मुझ को देख कर जन्नत में सब बोले
ये काफ़िर क्यूँ चला आया मुसलमानों की बस्ती में
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टैग : जन्नत
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तबीअ'त जो सब्र-आज़मा हो गई
जफ़ा रफ़्त: रफ़्त: वफ़ा हो गई
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टैग : जफ़ा
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मोहब्बत ख़ौफ़-ए-रुस्वाई का बाइ'स बन ही जाती है
तरीक़-ए-इश्क़ में अपनों से पर्दा हो ही जाता है
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टैग : ख़ौफ़
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उस से कह दो कि वो जफ़ा न करे
कहीं मुझ सा उसे ख़ुदा न करे
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टैग : जफ़ा
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तुम अपनी ज़ुल्फ़ खोलो फिर दिल-ए-पुर-दाग़ चमकेगा
अंधेरा हो तो कुछ कुछ शम्अ' की आँखों में नूर आए
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टैग : अँधेरा
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ख़ून-ए-दिल जितना था सारा वक़्फ़-ए-हसरत कर दिया
इस क़दर रोया कि मेरी आँख में आँसू नहीं
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टैग : आँसू
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मैं अँधेरी गोर हूँ और तू तजल्ली तूर की
रौशनी दे जा चराग़-ए-रू-ए-जानाना मुझे
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टैग : चराग़
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मोहब्बत में सरापा आरज़ू-दर-आरज़ू मैं हूँ
तमन्ना दिल मिरा है और मिरे दिल की तमन्ना तू
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टैग : आरज़ू
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तू ऐ मोहब्बत गवाह रहना कि तेरे 'मुज़्तर' को वक़्त-ए-आख़िर
ख़याल-ए-तर्क-ए-ख़ुदी रहा है तो दिल में याद-ए-ख़ुदा रही है
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टैग : ख़ुदी
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वस्ल का इंतिज़ार ही अच्छा
ये तो 'मुज़्तर' ख़ुदा करे कि न हो
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टैग : इंतिज़ार
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किसी बुत की अदा ने मार डाला
बहाने से ख़ुदा ने मार डाला
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टैग : आसमान
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वो तूर वाली तिरी तजल्ली ग़ज़ब की गर्मी दिखा रही है
वहाँ तो पत्थर जला दिए थे यहाँ कलेजा जला रही है
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टैग : गर्मी
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मैं क्या बेवफ़ा हूँ कि महशर में क़ातिल ख़ुदा से करूँ शिकवः-ए-क़त्ल अपना
ज़माना कहे ख़ून-ए-नाहक़ बहाया अगर मुझ से पूछा तो पानी कहूँगा
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टैग : क़ातिल
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न तुम आए न अपनी याद को भेजा मिरे दिल में
ये वो घर है कि जिस को तुम ने रखा बे-मकीं बरसों
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टैग : घर
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तिरा तर्क-ए-सितम भी इक सितम है ये सितम कैसा
तिरी तर्क-ए-जफ़ा भी इक जफ़ा है ये जफ़ा क्यूँ है
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टैग : जफ़ा
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मियान-ए-तिश्नगी प्यासों ने ऐसी लज़्ज़तें लूटीं
कि आब-ए-तेग़-ए-क़ातिल बे-मज़ा मा’लूम होता है
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टैग : क़ातिल
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गोर देती है नवेद-ए-रस्म-ए-मेहमानी मुझे
घर बसाने ले चली है मेरी वीरानी मुझे
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टैग : घर
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आँखों में तिरे घर का नक़्शा नज़र आता है
का'बे की सियह-पोशी पुतली से अयाँ कर दी
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टैग : घर
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अंधेरा क़ब्र का देखा तो फिर याद आ गए गेसू
मैं समझा था कि अब मैं तेरे काकुल से निकल आया
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टैग : क़ब्र
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere