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रूमी

1207 - 1273 | कोन्या, तुर्की

मशहूर फ़ारसी शाइ’र, मसनवी-ए-मा’नवी, फ़ीहि मा फ़ीह और दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी के मुसन्निफ़, आप दुनिया-भर में अपनी ला-ज़वाल तसनीफ़ मसनवी की ब-दौलत जाने जाते हैं, आपका मज़ार तुर्की में है ।

मशहूर फ़ारसी शाइ’र, मसनवी-ए-मा’नवी, फ़ीहि मा फ़ीह और दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी के मुसन्निफ़, आप दुनिया-भर में अपनी ला-ज़वाल तसनीफ़ मसनवी की ब-दौलत जाने जाते हैं, आपका मज़ार तुर्की में है ।

रूमी

मसनवी 97

फ़ारसी कलाम 38

रूबाई 7

फ़ारसी सूफ़ी काव्य 203

मल्फ़ूज़ 71

सूफ़ी उद्धरण 191

तुम ज़मीन वालों पर मेहरबानी करो, आसमान वाला तुम पर मेहरबान होगा। तुम बहादुरों के हथियार जिस्म पर सजा लो, लेकिन अगर तुम उन के अह्ल नहीं तो वो तुम्हारे लिए मुसीबत-ए-जान है।

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अपने अल्फ़ाज़ को ऊँचा करो, अपनी आवाज़ को नहीं। बारिश से फूल उगते हैं, बिजली से नहीं।

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ख़ामोशी, ख़ुदा की ज़बान है और बाक़ी सब एक ख़राब अनुवाद है।

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दो क़िस्म के लोग कभी संतुष्ट नहीं होते, दुनिया का चाहने वाला और इल्म चाहने वाला।

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वो दुश्मन कितना अच्छा दुश्मन है, जो अपने ऐबों पर निगाह रखता है और अगर कोई उसे उस के ऐबों के बारे में बताए, तो तस्लीम भी कर लेता है।

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सूफ़ी कहानी 121

पुस्तकें 20

वीडियो 25

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रहीम महरिया

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