रियाज़ ख़ैराबादी के अशआर
हैं सदक़े किसे आज प्यार आ गया
ये कौन आ गया मेरे आग़ोश में
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हमें ख़ुदा के सिवा कुछ नज़र नहीं आता
निकल गए हैं बहुत दूर जुस्तुजू करते
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टैग : ख़ुदा
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हसीन भी हूँ ख़ुश-आवाज़ भी फ़रिश्ता-ए-क़ब्र
कटी है उम्र हसीनों से गुफ़्तुगू करते
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टैग : क़ब्र
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सुना है हम ने बहुत कुछ कलीम के मुँह से
हम आएँ तो हमें आवाज़ ही सुना देना
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टैग : आवाज़
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हमें है घर से तअ'ल्लुक़ अब इस क़दर बाक़ी
कभी जो आए तो दो-दिन को मेहमाँ की तरह
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टैग : घर
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ऐ क़यामत आ भी तेरा हो रहा है इंतिज़ार
उन के दर पर लाश इक रखी है कफ़्नाई हुई
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टैग : इंतिज़ार
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वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता
किस घर में ख़ुशी होती है मातम नहीं होता
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टैग : ख़ुशी
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'रियाज़' मौत है इस शर्त से हमें मंज़ूर
ज़मीं सताए न मरने पे आसमाँ की तरह
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टैग : आसमान
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ख़ुदा जाने दिखाए गी ये क्या रँग
दुआ'एँ जम्अ' हैं अ'र्श-ए-बरीं पर
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टैग : ख़ुदा
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हरम है जा-ए-अदब काम देगी जन्नत में
फ़रिश्तो ताक़ से बोतल ज़रा उठा देना
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टैग : जन्नत
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वो कुछ ग़ैर से वा'दा फ़रमा रहे हैं
मरे सर की झूटी क़सम खा रहे हैं
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टैग : ग़ैर
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उड़ती थी वो शय आती थीं जन्नत की हवाएँ
अब रिंदों का जमघट सर-ए-ज़मज़म नहीं होता
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बला है क़ब्र की शब इस से बढ़ के हश्र के दिन
न आऊँ होश में इतनी मुझे पिला देना
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टैग : क़ब्र
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समाए हैं अपने निगाहों में ऐसे
जब आईना देखा है हैराँ हुए हैं
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टैग : आईना
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ख़ुदा जाने कहता हूँ मस्ती में क्या
ख़ुदा जाने बकता हूँ क्या जोश में
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टैग : ख़ुदा
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शाद के नाम से हर रंज-ओ-ख़ुशी हो के 'रियाज़'
सद्र-ए-आ'ज़म को शब-ओ-रोज़ दुआ' देता है
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टैग : ख़ुशी
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ऐ शब-ए-फ़ुर्क़त न आई तुझ को शर्म
ग़ैर के घर जा के मुँह काला किया
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टैग : घर
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कलीम बात बढ़ाते न गुफ़्तुगू करते
लब-ए-ख़ामोश से इज़हार-ए-आरज़ू करते
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टैग : इज़हार
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कुछ आवाज़ें आती हैं सुनसान शब में
अब उन से भी ख़ाली बयाबाँ हुए हैं
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टैग : आवाज़
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बहुत ही ख़ैर गुज़री होते होते रह गई उस से
जिसे में ग़ैर समझा हूँ वो उन का पासबाँ होगा
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टैग : ग़ैर
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कमर सीधी करने ज़रा मय-कदे में
अ'सा टेकते क्या 'रियाज़' आ हे हैं
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टैग : कमर
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न लाला-ज़ार बनाना मज़ार को न सही
चराग़ के आगे कभी शाम को जला देना
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नहीं पड़ते हैं ज़मीं पर जो तिरे नक़्श-ए-क़दम
क्यूँ उड़े रंग-ए-हिना ग़ैर के घर जाने में
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टैग : ग़ैर
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ये दिल की तड़प क्या लहद को हिलाती
तुम्हें क़ब्र पर पाँव धरना न आया
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टैग : क़ब्र
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रंग पर कल था अभी लाला-ए-गुलशन कैसा
बे-चराग़ आज है हर एक नशेमन कैसा
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आराम हो सुकून हो सारे जहान को
जुम्बिश न हो ज़मीं की तरह आसमान को
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टैग : आसमान
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कलीम बात बढ़ाते न गुफ़्तुगू करते
लब-ए-ख़ामोश से इज़हार-ए-आरज़ू करते
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टैग : आरज़ू
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जुब्बः-साई जिस से की क़िस्मत चमक उठी 'रियाज़'
हज़रत-ए-'साहिर' के दर से क्यूँ हमारा सर उठे
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टैग : क़िस्मत
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और भी चाँद की शक्लें हैं नहीं आप न हों
नूर की शमएँ नहीं रौशन मिरे काशाने में
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टैग : चाँद
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हुआ क्या पड़ा आईना बीच में
ये था कौन किस से लड़ाई हुई
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टैग : आईना
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कहते हैं महक कर गुल-ए-मज़्मून मनाक़िब
फूलों में 'रियाज़' आप के ख़ुशबू-ए-अ'ली है
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टैग : गुल
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मौज-ए-तूफ़ाँ फेंक देगी उस को साहिल की तरफ़
पार अब कश्ती मिरी ऐ नाख़ुदा हो जाएगी
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टैग : कश्ती
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तुम जा के चमन में गुल-ओ-बुलबुल को तो देखो
क्या लुत्फ़ तह-ए-चादर शबनम नहीं होता
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टैग : गुल
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तेग़ ही क्या हाथ में क़ातिल के थी
ऐ हिना तू भी तो सानी जाएगी
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टैग : क़ातिल
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कोई मस्त-ए-मय-कद: आ गया मय-ए-बे-ख़ुदी पिला गया
न सदा-ए-नग़्मा-ए-दैर उठे न हरम से शोर-ए-अज़ाँ उठा
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ये इंसान बन जाएँ कुछ साथ रह कर
फ़रिश्तों को हम राह पर ला रहे हैं
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टैग : इंसान
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हश्र में क़ातिल ने देखी है लहू की कोइ छींट
सू-ए-दामन क्यूँ झुकी है आँख शर्माई हुई
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टैग : क़ातिल
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बे-पिए भी सुब्ह-ए-महशर हम को लग़्ज़िश है बहुत
क़ब्र से क्यूँ कर उठें बार-ए-गुनाह क्यूँ कर उठे
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टैग : गुनाह
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जाते जाते अर्सा-ए-गाह-ए-हश्र तक जो हाल हो
उठते उठते क़ब्र में सौ फ़ित्ना-ए-महशर उठे
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टैग : क़ब्र
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वहीं आ बैठा उठ कर उधर से
मिला है घर मिरा दुश्मन के घर से
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टैग : घर
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वो मल के दस्त-ए-हिनाई से दिल लहू करते
हम आरज़ू को हसीं ख़ून-ए-आरज़ू करते
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टैग : आरज़ू
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ऐ असीरान-ए-क़फ़स आने को है फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ
चार-दिन में और गुलशन की हवा हो जाएगी
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टैग : ख़िज़ाँ
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ऐ असीरान-ए-क़फ़स आने को है फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ
चार-दिन में और गुलशन की हवा हो जाएगी
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फ़रिश्ते मरे बाँट लें कुछ गुनाह
कमी हो गर अम्बारी दोश में
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टैग : गुनाह
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न तरसा उन्हें आब-ए-ख़ंजर को क़ातिल
दु’आएँ तुझे देंगे बिस्मिल हज़ारों
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टैग : क़ातिल
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ये गुलचीं ने क्यूँ फूल गुलशन में तोड़ा
कि इस पर हैं टूटे अ'ना दिल हज़ारों
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टैग : गुलशन
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ऐसे भी हैं दुनिया में जिन्हें ग़म नहीं होता
इक ग़म है हमारा जो कभी कम नहीं होता
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टैग : ग़म
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रात-दिन अंगड़ाइयाँ वो लें मेरी आग़ोश में
जिन हसीनों के लिए पैदा ये अंगड़ाई हुई
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टैग : आग़ोश
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बने शो'ले बिजली के क़िस्मत से मेरी
जो तिनके थे कुछ आशियाने के क़ाबिल
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टैग : क़िस्मत
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गराँ है तौब: को मीना का शोर-ए-क़ुलक़ुल भी
ये गुल मचाए तो उस का गला दबा देना
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टैग : गुल
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere