आदमी के लिए क़ुव्वत मुक़द्दम है, अगर क़ुव्वत जाती रही तो मुजाहिदा मुमकिन नहीं और माँ के दूध की क़ुव्वत चालीस साल तक रहती है, उसके बाद ग़िज़ा की क़ुव्वत है। मंशा यह है कि ‘‘जवानी को ग़नीमत जानो’’।
Share this
अगर सब कुछ सिर्फ़ इल्म-ओ-इबादत पर मुन्हसिर होता, तो शैतान रांदा-ए-दरगाह न किया जाता, बल्कि सब कुछ इनायत-ए-इलाही पर मुन्हसिर है।
Share this
बंदा रज़ा-ए-मौला के ख़िलाफ़ काम कर ही नहीं सकता।
Share this
तवज्जोह इस का नाम है कि एक निगाह तमाम उम्र के लिए काफ़ी हो जाए।
Share this
वज्द में आदमी बेहोश नहीं होता बल्कि बेख़ुद हो जाता है। अगर बेहोश हो गया, तो लुत्फ़ जाता रहता है।
You have exhausted 5 free content pages per year. Register and enjoy UNLIMITED access to the whole universe of Urdu Poetry, Rare Books, Language Learning, Sufi Mysticism, and more.