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सूफ़ी/संतों की सूची

सैंकड़ों सूफ़ी/संतों का चुनिंदा कलाम

मा’रूफ़ हिन्दुस्तानी शाइ’र और हाजी वारिस अ’ली शाह के मुरीद

मीलाद-ए-अकबर के मुसन्निफ़ और ना’त गो-शाइ’र

दाग़ देहलवी के समकालीन। अपनी ग़ज़ल ' सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता ' के लिए प्रसिद्ध हैं।

रुहानी शाइ’र और “वारिस बैकुंठ पठावन” के मुसन्निफ़

ख़्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया के चहेते मुरीद और फ़ारसी-ओ-उर्दू के पसंदीदा सूफ़ी शाइ’र, माहिर-ए-मौसीक़ी, उन्हें तूती-ए-हिंद भी कहा जाता है

चौदहवीं सदी हिज्री का एक सूफ़ी शाइ’र

बारहवीं सदी के मुबल्लिग़ और सूफ़ी बुज़ुर्ग थे, उनको क़ुरून-इ-वुस्ता के सबसे मुमताज़ और क़ाबिल-ए-एहतिराम सूफ़िया में से एक कहा गया है, उनका मज़ार पाकपतन, पाकिस्तान में है

दिल्ली की काव्य परम्परा के अंतिम दौर के शायरों में शामिल, अपने ड्रामे ‘कृष्ण अवतार’ के लिए प्रसिद्ध

हाजी वारिस अ’ली शाह के मुमताज़ मुरीद और वहीद इलाहाबादी के शागिर्द-ए-रशीद

नूह नारवी के शागिर्द, शायरी में आवामी रोज़मर्रा को जगह दी. ग़ज़लों के साथ अहम मज़हबी और जनप्रतिनिधियों पर नज़्में लिखीं

पंजाब के मा’रूफ़ सूफ़ी शाइ’र जिनके अशआ’र से आज भी एक ख़ास रंग पैदा होता है और रूह को तस्कीन मिलती है

क़ौमी, सामाजिक और देश की आज़ादी की भावना से समर्पित नज़्मों के लिए प्रसिद्ध. लम्बे अरसे तक उर्दू-फ़ारसी के उस्ताद रहे

मुग़लिया सल्तनत के बादशाह शाहजहाँ और मलिका मुमताज़ के बड़े साहिबज़ादे जिन्होंने सूफ़ियाना रिवायत को मज़ीद जिला बख़्शी, उनके तअ’ल्लुक़ात सिखों के गुरुओं से निहायत ख़ुश-गवार थे।

पाकिस्तान के मशहूर सूफ़ी और कश्फ़ुलमहजूब के मुसन्निफ़

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

सूफ़ियाना शे’र कहने वाला एक आ’लमी शाइ’र और मुसन्निफ़

पंद्रहवीं सदी के एक सूफ़ी शाइ’र और संत जिन्हें भगत कबीर के नाम से भी जाना जाता है, कबीर अपने दोहे की वजह से काफ़ी मशहूर हैं, उन्हें भक्ति तहरीक का सबसे बड़ा शाइ’र होने का ए’ज़ाज़ हासिल है

सिलसिला-ए-चिश्तिया के अ’ज़ीम रहनुमा और दकन के मुम्ताज़ सूफ़ी

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